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योगिनी एकादशी

आषाढ़ कृष्ण एकादशी

आषाढ़ · कृष्ण पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

देवशयनी एकादशी से ठीक पहले आने वाली यह एकादशी रोग-शोक से राहत देने वाली मानी जाती है।

कथा

अलकापुरी में हेममाली नाम का एक सेवक रहता था, जो कुबेर के लिए फूल लाता था। एक दिन कर्तव्य में लापरवाही के कारण वह समय पर फूल नहीं पहुँचा पाया। कुबेर ने उसे श्राप दिया और वह कष्टपूर्ण जीवन जीने लगा। एक ऋषि ने उसे आषाढ़ कृष्ण एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी। हेममाली ने श्रद्धा से व्रत किया, अपनी भूल स्वीकार की और सदाचार अपनाया। कथा के अनुसार, उसे श्राप से मुक्ति मिली।

योगिनी एकादशी का संदेश है कि कर्तव्यनिष्ठा, पश्चात्ताप और भक्ति से जीवन में सुधार आता है।

🙏 हे प्रभु, हमें अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने की प्रेरणा दें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026
एकादशी तिथि: 10 जुलाई 2026 08:16 से 11 जुलाई 2026 05:23 तक
पारण: 11 जुलाई 2026 को सूर्योदय (5:31 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:05 AM (+1d)) से पहले
बुधवार, 30 जून 2027
एकादशी तिथि: 29 जून 2027 22:04 से 30 जून 2027 20:31 तक
पारण: 1 जुलाई 2027 को सूर्योदय (5:27 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (6:15 PM) से पहले
रविवार, 18 जून 2028
एकादशी तिथि: 18 जून 2028 02:27 से 19 जून 2028 03:15 तक
पारण: 19 जून 2028 को सूर्योदय (5:24 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (3:22 AM (+1d)) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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