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चालीसा, कथा और पूजा विधि खोजें

हर चालीसा, आरती, व्रत कथा और पूजा विधि एक ही कार्ड में — पूरा पाठ पढ़ें और सीधे WhatsApp पर शेयर करें।

जैसे:

66 कार्ड

🕉 चालीसाहनुमान जी · मंगलवार और शनिवार

हनुमान चालीसा

॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

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🕉 चालीसाभगवान शिव · सोमवार और प्रदोष

शिव चालीसा

॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजासुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान॥

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🪔 आरतीश्री गणेश · बुधवार और किसी भी पूजा की शुरुआत में

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पारवती पिता महादेवा॥ एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी। पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

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🪔 आरतीभगवान विष्णु (जगदीश) · गुरुवार, एकादशी और हर पूजा के अंत में

ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

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🪔 आरतीभगवान शिव · सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि

शिव आरती — ॐ जय शिव ओंकारा

ॐ जय शिव ॐकारा, स्वामी हर शिव ॐकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा॥ जय शिव ॐकारा॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे स्वामी पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृष वाहन साजे॥ जय शिव ॐकारा॥

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🪔 आरतीहनुमान जी · मंगलवार और शनिवार

हनुमान जी की आरती

आरति कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर काँपे रोग दोष जाके निकट न झाँके। अंजनि पुत्र महा बलदायी संतन के प्रभु सदा सहायी॥ आरति कीजै हनुमान लला की।

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🪔 आरतीदेवी लक्ष्मी · शुक्रवार और दीपावली

लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता तुम को निस दिन सेवत, मैयाजी को निस दिन सेवत हर विष्णु विधाता। ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता ओ मैया तुम ही जग माता। सूर्य चन्द्र माँ ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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🪔 आरतीमाँ दुर्गा · मंगलवार, शुक्रवार और नवरात्रि

जय अम्बे गौरी — दुर्गा आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी। बोलो जय अम्बे गौरी॥ माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को मैया टीको मृगमद को उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको बोलो जय अम्बे गौरी॥

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🪔 आरतीसन्तोषी माता · शुक्रवार

सन्तोषी माता की आरती

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता। मैया जय सन्तोषी माता। सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हो मैया माँ धारण कींहो हीरा पन्ना दमके तन शृंगार कीन्हो मैया जय सन्तोषी माता।

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📖 व्रत कथाएकादशी व्रत

एकादशी की उत्पत्ति की कथा

पुराणों में कथा आती है कि सत्ययुग में मुर नाम का बलशाली दैत्य था। उसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया। दुखी देवता भगवान शिव के पास गए, और शिव जी ने उन्हें भगवान विष्णु की शरण में भेजा।

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📖 व्रत कथापूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण पूजा

सत्यनारायण कथा (संक्षेप)

नारद मुनि ने पृथ्वी पर लोगों के कष्ट देखे और भगवान विष्णु से सरल उपाय पूछा। प्रभु ने सत्यनारायण व्रत का महत्त्व बताया।

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📖 व्रत कथाअमावस्या — पितृ-स्मरण, स्नान और दान

कर्ण और पितरों के भोजन की कथा (लोक-परंपरा)

लोक-परंपरा में कथा आती है कि महाभारत के दानवीर कर्ण ने जीवन भर सोना-चाँदी दान किया, पर अन्न का दान नहीं किया। मृत्यु के बाद स्वर्ग में उन्हें भोजन के रूप में सोना ही मिला।

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📖 व्रत कथाप्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत की कथा

स्कंद पुराण की कथा के अनुसार एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ भिक्षा से जीवन चलाती थी। एक दिन उसे विदर्भ का एक राजकुमार धर्मगुप्त मिला, जिसके पिता को शत्रुओं ने मार दिया था। ब्राह्मणी ने उसे अपने पुत्र की तरह रखा।

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📖 व्रत कथाचैत्र शुक्ल एकादशी

कामदा एकादशी — कथा

चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी हिंदू नववर्ष के बाद की पहली एकादशी है। मान्यता है कि यह मनोकामनाएँ पूरी करने वाली और पापों का शमन करने वाली है।

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📖 व्रत कथाचैत्र कृष्ण एकादशी

पापमोचनी एकादशी — कथा

नाम का अर्थ है पापों से मुक्ति दिलाने वाली। होली के बाद आने वाली यह एकादशी आत्म-शुद्धि और संयम की याद दिलाती है।

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📖 व्रत कथावैशाख कृष्ण एकादशी

वरूथिनी एकादशी — कथा

‘वरूथिनी’ का अर्थ है रक्षा करने वाली। इसे सौभाग्य और सुरक्षा देने वाली एकादशी माना जाता है।

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📖 व्रत कथावैशाख शुक्ल एकादशी

मोहिनी एकादशी — कथा

भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ी यह एकादशी मोह और भटकाव से मुक्ति का संदेश देती है।

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📖 व्रत कथाज्येष्ठ कृष्ण एकादशी

अपरा (अचला) एकादशी — कथा

‘अपरा’ का अर्थ है अपार — अपार पुण्य देने वाली। कई स्थानों पर इसे अचला एकादशी भी कहते हैं।

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📖 व्रत कथाभीमसेनी एकादशी · ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

निर्जला एकादशी — कथा

सबसे कठिन एकादशी, जिसमें जल भी ग्रहण नहीं किया जाता। मान्यता है कि इस एक व्रत से साल की सभी एकादशियों का फल मिलता है। गर्मी में स्वास्थ्य की स्थिति देखकर ही निर्जल उपवास करें; बीमार, वृद्ध और गर्भवती लोग फलाहार या जल ले सकते हैं।

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📖 व्रत कथाआषाढ़ कृष्ण एकादशी

योगिनी एकादशी — कथा

देवशयनी एकादशी से ठीक पहले आने वाली यह एकादशी रोग-शोक से राहत देने वाली मानी जाती है।

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