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देवशयनी एकादशी

हरिशयनी · आषाढ़ी एकादशी · पद्मा एकादशी

आषाढ़ · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास शुरू होता है। चार महीने विवाह आदि मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। महाराष्ट्र में यह पंढरपुर की वारी का मुख्य दिन है।

कथा

आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है। देवउठनी एकादशी पर उनके जागरण का उत्सव मनाया जाता है। कथा-परंपरा में राजा मान्धाता की प्रजा लंबे समय तक वर्षा न होने से दुखी हुई। राजा ने ऋषियों से उपाय पूछा। उन्हें भगवान विष्णु की आराधना और देवशयनी एकादशी के व्रत का महत्व बताया गया। श्रद्धा और सत्कर्म से आशा तथा एकता का संचार हुआ।

इस एकादशी का संदेश है कि चातुर्मास में संयम, सेवा, जप, दान और आत्मचिंतन को विशेष महत्व दें।

🙏 हे श्रीहरि, हमारे जीवन में शांति, संतुलन और सद्भाव बनाए रखें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

शनिवार, 25 जुलाई 2026
एकादशी तिथि: 24 जुलाई 2026 09:13 से 25 जुलाई 2026 11:34 तक
पारण: 26 जुलाई 2026 को सूर्योदय (5:39 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (1:58 PM) से पहले
बुधवार, 14 जुलाई 2027
एकादशी तिथि: 13 जुलाई 2027 12:09 से 14 जुलाई 2027 13:10 तक
पारण: 15 जुलाई 2027 को सूर्योदय (5:33 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:41 PM) से पहले
रविवार, 2 जुलाई 2028
एकादशी तिथि: 2 जुलाई 2028 01:14 से 3 जुलाई 2028 00:04 तक
पारण: 3 जुलाई 2028 को सूर्योदय (5:28 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:18 PM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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