विजया एकादशी
फाल्गुन कृष्ण एकादशी
महत्त्व
‘विजया’ अर्थात विजय दिलाने वाली। मुश्किल कामों और परीक्षा-प्रतियोगिता से पहले इसे शुभ माना जाता है।
कथा
रामायण-परंपरा से जुड़ी कथा के अनुसार, श्रीराम को सीता जी की खोज में समुद्र पार करना था। समुद्र के पार जाने का उपाय जानने के लिए उन्होंने ऋषियों से परामर्श किया। ऋषि ने फाल्गुन कृष्ण एकादशी का व्रत करने और भगवान की आराधना करने का सुझाव दिया। श्रीराम और उनके साथियों ने विधिपूर्वक व्रत किया। कथा के अनुसार, उन्हें विजय का मार्ग मिला और आगे चलकर धर्म की अधर्म पर विजय हुई।
विजया एकादशी का संदेश है कि कठिन कार्यों में धैर्य, उचित सलाह, एकता और धर्मपूर्ण प्रयास आवश्यक हैं।
🙏 हे प्रभु, हमें कठिनाइयों का सामना साहस, विवेक और सत्य के साथ करने की शक्ति दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 14 फ़रवरी 2026 को सूर्योदय (7:01 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:02 PM) से पहले
पारण: 4 मार्च 2027 को सूर्योदय (6:44 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (9:54 AM (+1d)) से पहले
पारण: 21 फ़रवरी 2028 को सूर्योदय (6:55 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:09 AM (+1d)) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।