जया एकादशी
भीष्म एकादशी · माघ शुक्ल एकादशी
महत्त्व
माघ शुक्ल एकादशी को जया या भैमी एकादशी कहा जाता है। इसे भय और नकारात्मकता से मुक्ति देने वाली माना जाता है।
कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्गलोक में माल्यवान नाम का गंधर्व और पुष्पवती नाम की गंधर्व कन्या एक अवसर पर अपने कर्तव्य से विचलित हो गए। इससे इंद्र अप्रसन्न हुए और उन्हें पृथ्वी पर कष्टपूर्ण जीवन बिताने का श्राप मिला। दोनों को अपने आचरण पर पछतावा हुआ। माघ शुक्ल एकादशी के दिन उन्होंने अनजाने में उपवास किया और भगवान का स्मरण किया। कथा के अनुसार, इस पुण्य से उनका श्राप समाप्त हुआ और वे अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त हुए।
जया एकादशी का संदेश है कि भूल होने पर अहंकार के बजाय पश्चात्ताप, सुधार और ईश्वर-स्मरण का मार्ग अपनाना चाहिए।
🙏 हे भगवान, हमें अपने दोष पहचानने और उन्हें सुधारने की शक्ति दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 30 जनवरी 2026 को सूर्योदय (7:10 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:10 AM) से पहले
पारण: 18 फ़रवरी 2027 को सूर्योदय (6:57 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:28 PM) से पहले
पारण: 8 फ़रवरी 2028 को सूर्योदय (7:05 AM) के बाद
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।