वरूथिनी एकादशी
वैशाख कृष्ण एकादशी
महत्त्व
‘वरूथिनी’ का अर्थ है रक्षा करने वाली। इसे सौभाग्य और सुरक्षा देने वाली एकादशी माना जाता है।
कथा
वरुथिनी एकादशी वैशाख कृष्ण पक्ष में आती है। इसकी महिमा में एक राजा की कथा सुनाई जाती है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और दान का मार्ग नहीं छोड़ा। भगवान विष्णु की कृपा से उसे संकटों से रक्षा और जीवन में शुभ फल प्राप्त हुए, ऐसा वर्णन मिलता है। इस व्रत में दया, संयम, जरूरतमंदों को सहायता और बुरे आचरण से बचने पर जोर दिया जाता है। “वरुथिनी” का भाव रक्षा और कल्याण से भी जोड़ा जाता है।
इस एकादशी का संदेश है कि धर्मपूर्ण आचरण और दूसरों की सहायता मनुष्य को आंतरिक बल देते हैं।
🙏 हे भगवान विष्णु, हमें विपत्तियों में धैर्य और दूसरों की रक्षा करने का विवेक दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 14 अप्रैल 2026 को सूर्योदय (5:57 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (12:13 AM (+1d)) से पहले
पारण: 3 मई 2027 को सूर्योदय (5:39 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:05 PM) से पहले
पारण: 21 अप्रैल 2028 को सूर्योदय (5:49 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (9:04 PM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।