मोहिनी एकादशी
वैशाख शुक्ल एकादशी
महत्त्व
भगवान विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ी यह एकादशी मोह और भटकाव से मुक्ति का संदेश देती है।
कथा
समुद्र मंथन के समय अमृत प्राप्त होने पर देवताओं और असुरों में उसे पाने के लिए विवाद हुआ। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का अद्भुत रूप धारण किया और अपनी बुद्धिमत्ता से अमृत देवताओं को दिलाया। इस कथा से मोहिनी रूप की महिमा जुड़ी है। एक अन्य प्रचलित कथा में एक दुखी मनुष्य को ऋषि वैशाख शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह देते हैं। व्रत और भगवान के स्मरण से उसका मन शुद्ध होता है और वह जीवन में सही मार्ग अपनाता है।
मोहिनी एकादशी का संदेश है कि मोह और भ्रम से बचकर विवेक, सत्य और ईश्वर-स्मरण का सहारा लेना चाहिए।
🙏 हे प्रभु, हमें भ्रम से बचाकर सही और गलत में भेद करने की बुद्धि दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 28 अप्रैल 2026 को सूर्योदय (5:43 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (6:52 PM) से पहले
पारण: 17 मई 2027 को सूर्योदय (5:30 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:29 PM) से पहले
पारण: 6 मई 2028 को सूर्योदय (5:36 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:49 AM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।