पापांकुशा एकादशी
आश्विन शुक्ल एकादशी
महत्त्व
‘पाप’ पर ‘अंकुश’ — यानी बुरी प्रवृत्तियों पर संयम। यह दशहरे के अगले दिन आती है।
कथा
आश्विन शुक्ल एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। इसकी महिमा में भगवान पद्मनाभ की पूजा, जप, दान और सदाचार का महत्व बताया गया है। कथा-परंपरा में एक मनुष्य को अपने बुरे कर्मों का बोध हुआ। संतों ने उसे बताया कि केवल भय से नहीं, बल्कि सच्चे पश्चात्ताप और व्यवहार में परिवर्तन से जीवन सुधरता है। उसने भगवान का स्मरण किया, दान दिया और दूसरों को कष्ट न पहुँचाने का संकल्प लिया।
पापांकुशा एकादशी का संदेश है कि आत्मचिंतन के साथ गलतियों को सुधारें और दया, सत्य तथा सेवा का जीवन अपनाएँ।
🙏 हे पद्मनाभ, हमें पापपूर्ण विचारों और कर्मों से दूर रखकर धर्म के मार्ग पर चलाएँ।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 23 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय (6:27 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:36 PM) से पहले
पारण: 12 अक्टूबर 2027 को सूर्योदय (6:20 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:14 PM) से पहले
पारण: 30 सितंबर 2028 को सूर्योदय (6:14 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:34 PM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।