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इंदिरा एकादशी

आश्विन कृष्ण एकादशी

आश्विन · कृष्ण पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

पितृपक्ष में आने के कारण इसे पितरों की शांति और श्राद्ध से जोड़ा जाता है।

कथा

प्राचीन कथा में राजा इंद्रसेन धर्मपूर्वक राज्य करते थे। एक दिन उन्हें अपने पिता की स्थिति के बारे में पता चला और मालूम हुआ कि उन्हें मुक्ति की आवश्यकता है। राजा ने ऋषि से उपाय पूछा। ऋषि ने आश्विन कृष्ण एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य पितरों को समर्पित करने का सुझाव दिया। राजा ने विधिपूर्वक व्रत, पूजा और दान किया। कथा के अनुसार, उनके पिता को सद्गति मिली और राजा को संतोष प्राप्त हुआ। इंदिरा एकादशी पितरों के स्मरण, परिवार के प्रति कृतज्ञता और सद्कर्मों के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।

🙏 हे श्रीहरि, हमारे पितरों को शांति दें और हमें अपने परिवार तथा समाज के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा दें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
एकादशी तिथि: 6 अक्टूबर 2026 02:08 से 7 अक्टूबर 2026 00:35 तक
पारण: 7 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय (6:17 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:17 PM) से पहले
रविवार, 26 सितंबर 2027
एकादशी तिथि: 25 सितंबर 2027 22:31 से 26 सितंबर 2027 19:49 तक
पारण: 27 सितंबर 2027 को सूर्योदय (6:12 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:56 PM) से पहले
शुक्रवार, 15 सितंबर 2028
एकादशी तिथि: 14 सितंबर 2028 15:55 से 15 सितंबर 2028 13:42 तक
पारण: 16 सितंबर 2028 को सूर्योदय (6:07 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:52 AM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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