धनतेरस
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
तिथि और समय
पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट) में होती है, जब त्रयोदशी तिथि उपस्थित हो।
महत्त्व
धनतेरस दीपावली उत्सव का पहला दिन है। इस दिन भगवान धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) की जयंती और माँ लक्ष्मी तथा कुबेर की पूजा होती है। परंपरा में इस दिन नए बर्तन, चाँदी या अन्य धातु की वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है और संध्या को यम-दीपदान किया जाता है।
पूजा सामग्री
धन्वंतरि/लक्ष्मी-कुबेर का चित्र या प्रतिमा, दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई-फल, नए बर्तन या सिक्के, आटे/तिल के तेल का चौमुखा दीपक
पूजा विधि
- घर और प्रवेश-द्वार की सफ़ाई करें, रंगोली बनाएँ और स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें।
- प्रदोष काल में चौकी पर धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की स्थापना करें और दीपक जलाएँ।
- रोली-अक्षत-फूल चढ़ाएँ; नया बर्तन या सिक्के पूजा में रखें और मिठाई-फल का भोग लगाएँ।
- धन्वंतरि और लक्ष्मी की आरती करें तथा परिवार के स्वास्थ्य और सुख की प्रार्थना करें।
- यम-दीपदान: संध्या के बाद आटे का चौमुखा दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाएँ।
ॐ धन्वंतरये नमः
कथा
समुद्र-मंथन की कथा के अनुसार इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए। यम-दीपदान से जुड़ी कथा में हिम नामक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। उसकी पत्नी ने उस रात घर के द्वार पर आभूषण और दीपों का ढेर लगाया और जागकर कथा-गीत सुनाए। यमराज की आँखें उस प्रकाश से चौंधिया गईं और वे बिना प्राण लिए लौट गए।
यह प्रचलित परंपरा के आधार पर लिखी संक्षिप्त कथा और विधि है। क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार रीति-रिवाज बदल सकते हैं; अपनी परंपरा या पंडित जी के निर्देश को प्राथमिकता दें। तिथि दिल्ली के लिए गणना की गई है।