अहोई अष्टमी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी

तिथि और समय

रविवार, 1 नवंबर 2026
तिथि 1 नवंबर 2026 और 2 नवंबर 2026 दोनों दिन रहती है — परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार दिन तय करें।
तिथि: 01/11 14:52 से 02/11 13:11 तक (IST)
सूर्यास्त 5:36 PM (दिल्ली)
शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027
तिथि 22 अक्टूबर 2027 और 23 अक्टूबर 2027 दोनों दिन रहती है — परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार दिन तय करें।
तिथि: 22/10 11:56 से 23/10 09:59 तक (IST)
सूर्यास्त 5:45 PM (दिल्ली)
बुधवार, 11 अक्टूबर 2028
तिथि: 11/10 05:48 से 12/10 04:55 तक (IST)
सूर्यास्त 5:55 PM (दिल्ली)

पूजा संध्या के समय होती है और तारों के दर्शन पर अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

महत्त्व

अहोई अष्टमी का व्रत माताएँ संतान की लंबी आयु और सुख-स्वास्थ्य की कामना से रखती हैं। यह दीवाली से लगभग आठ दिन पहले आता है। व्रत सूर्योदय से तारे (कुछ परंपराओं में चंद्रमा) के दर्शन तक रखा जाता है।

पूजा सामग्री

अहोई माता का चित्र (दीवार पर बना या छपा हुआ), जल का करवा, रोली, चावल, दूध-भात, फल, मिठाई, दीपक, चाँदी की “स्याहू” माला (जहाँ परंपरा हो)

पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें और दिन भर उपवास रखें।
  2. शाम को दीवार पर या चौकी पर अहोई माता का चित्र स्थापित करें; चित्र में स्याहू (साही) और उसके बच्चे बनाए जाते हैं।
  3. जल से भरा करवा रखें, दीपक जलाएँ और रोली-अक्षत-फूल से पूजा करें।
  4. अहोई अष्टमी की कथा सुनें और माता को दूध-भात, फल और मिठाई का भोग लगाएँ।
  5. तारे दिखाई देने पर करवे के जल से अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

ॐ अहोई मातायै नमः

कथा

प्रचलित कथा के अनुसार एक स्त्री दीवाली की सफ़ाई के लिए जंगल से मिट्टी खोद रही थी। अनजाने में उसकी खुरपी से स्याहू (साही) के एक बच्चे की मृत्यु हो गई। स्याहू के शाप से उस स्त्री के संतानों पर संकट आने लगा। दुखी होकर उसने अहोई माता की पूजा और अष्टमी का व्रत किया। माता की कृपा से शाप का प्रभाव दूर हुआ और संतान सुखी हुई।

जल-रहित व्रत हो तो स्वास्थ्य का ध्यान रखें; आवश्यकता पर जल/फल ले सकते हैं।

यह प्रचलित परंपरा के आधार पर लिखी संक्षिप्त कथा और विधि है। क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार रीति-रिवाज बदल सकते हैं; अपनी परंपरा या पंडित जी के निर्देश को प्राथमिकता दें। तिथि दिल्ली के लिए गणना की गई है।

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