आज का गीता श्लोक
2026-10-19 · भगवद्गीता 2.47
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
सरल अर्थ
तुम्हारा अधिकार कर्म करने में है, उसके फल पर नहीं। फल की चिंता में कर्म मत छोड़ो और न ही कर्म न करने में आसक्त हो।
संस्कृत पाठ भगवद्गीता का मूल पाठ है। अर्थ इस साइट के लिए सरल शब्दों में लिखे गए भाव हैं, किसी प्रकाशित टीका का अनुवाद नहीं।
और श्लोक
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