सफला एकादशी
पौष कृष्ण एकादशी
महत्त्व
‘सफला’ यानी कार्यों में सफलता देने वाली। सर्दी के मौसम में इसे नए आरंभ के लिए शुभ माना जाता है।
कथा
एक राजा का पुत्र लुम्पक दुष्ट आचरण करता था। उसके व्यवहार से दुखी होकर राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। वन में रहते हुए वह भूख और ठंड से परेशान रहा। पौष कृष्ण एकादशी के दिन वह भोजन नहीं कर पाया और रात में जागता रहा। उसने कुछ फल एक वृक्ष के नीचे रखकर ईश्वर का स्मरण किया। कथा के अनुसार, अनजाने में हुए उपवास और जागरण से उसके भीतर परिवर्तन आया। उसने बुरे कर्म छोड़ दिए, पिता के पास लौटकर धर्मपूर्वक जीवन बिताया और भगवान की भक्ति में मन लगाया।
सफला एकादशी का संदेश है कि सच्चा पश्चात्ताप और अच्छा आचरण जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
🙏 हे प्रभु, हमारे जीवन को सत्कर्मों में सफल बनाइए।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 4 जनवरी 2027 को सूर्योदय (7:15 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (6:16 PM) से पहले
पारण: 24 दिसंबर 2027 को सूर्योदय (7:11 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:09 PM) से पहले
पारण: 13 दिसंबर 2028 को सूर्योदय (7:05 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (12:57 PM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।