पापमोचनी एकादशी
चैत्र कृष्ण एकादशी
महत्त्व
नाम का अर्थ है पापों से मुक्ति दिलाने वाली। होली के बाद आने वाली यह एकादशी आत्म-शुद्धि और संयम की याद दिलाती है।
कथा
पौराणिक कथा में मेधावी नाम के ऋषि तपस्या में लीन थे। एक अप्सरा के कारण उनका ध्यान भंग हुआ और उन्हें अपनी भूल का बोध होने पर गहरा पश्चात्ताप हुआ। उन्होंने अपने पिता समान ऋषि से मार्ग पूछा। उन्हें चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु का स्मरण करने की सलाह दी गई। ऋषि ने श्रद्धा से व्रत किया और अपने आचरण को सुधारने का संकल्प लिया। कथा के अनुसार, उन्हें पापों से मुक्ति का मार्ग मिला।
पापमोचनी एकादशी का संदेश है कि गलतियों को स्वीकार करना, उनका प्रायश्चित करना और भविष्य में सही आचरण अपनाना आत्मशुद्धि का मार्ग है।
🙏 हे प्रभु, हमें अपनी भूलों को सुधारने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 16 मार्च 2026 को सूर्योदय (6:30 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (9:41 AM) से पहले
पारण: 3 अप्रैल 2027 को सूर्योदय (6:10 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:27 AM (+1d)) से पहले
पारण: 22 मार्च 2028 को सूर्योदय (6:23 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:57 AM (+1d)) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।